Tuesday, 22 November 2011

इक पत्ता मेरे पाँवों में


डॉ अनीता कपूर
क्षणिकाएँ
1
चाँद का गोटा लगा
किरणों वाली साड़ी पहने
सजी सँवरी रात ने
बंद कर दिया
दरवाजा आसमान का
2

अब तो आकर ले जाओ
उस भूले इश्क की परछाई को
सिसक रही हैं आज तक
दिले-कब्र में दफ़न
3
यादों की चारपाई
उम्र का बिछौना
नज्मों को ओढ़
पकड़ी ही रह गयी
उस रात का कोना
-0-
दिल की बात
1
लिपट गया टहनी से गिरकर, इक पत्ता मेरे पाँवों में
था वो ख्वाब अधूरा सा, लटका हुआ मेरी पलकों से.
2
सूखे हुए पत्ते ऐसे चरमराये तले पावों के
जैसे आंसू निकल रहे हो कसमसाती यादों के
3
गर शिकायतें न हों, तो गुफ्तगू भी न हों
गुफ्तगू में मसरूफियत भी, शि
कायत का सबब हों गया
-0-

4 comments:

  1. सभी रचनाएँ दिल की गहराई से निकलकर पाठक को अभिभूत कर देती हैं।

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  2. गहरे भाव... बहुत सुंदर

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  3. गहरे भाव... बहुत सुंदर

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  4. प्रेम और प्रणयपीर के भावों भरी सुन्दर रचनाएँ. " यादों की चारपाई / उम्र का बिछौना / नज्मों को ओढ़ / पकड़ी ही रह गयी / उस रात का कोना " बहुत पसंद आई !

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