Thursday, 23 August 2012

अभी-अभी 'विश्व हिन्दी न्यास', के द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में शिरकत करके लौटी हूँ.....सियाट्ल से पधारे हास्य कवि श्री अभिनव शुक्ल और न्यू यॉर्क से श्री अनूप भार्गव जी ने कवि सम्मेलन में 4 चाँद लगा दिये। हमने भी कविता पाठ किया.......एक फोटो अभिनव जी को अपने संग्रह भेंट करते हुए।


आज दिनांक 12 अगस्त, दैनिक हिंदुस्तान ने , हाल ही में प्रकाशित हमारा काव्य-संग्रह, 'साँसों के हस्ताक्षर" के बारे में एक संक्षिप्त रिपोर्ट प्रकाशित की है......


कवयित्री सम्मेलन में सम्मान लेते हुए........


। फिल्मोत्सव । 

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन 21 दिसम्बर से 27 दिसम्बर के मध्य सीरी फोर्ट आडिटोरियम एवं एनडीएमसी कंन्वेशन सेंटर में किया जाएगा। · ...........

Report......by Indiantelevision.com!

In addition to the Non Resident Indian Films, a section dedicated to the NRI writers has also been specially included in the festival in which a poetry collection book shall be launched as well. The book is edited by none other than the well-known senior journalist, Poetess and writer, Anita Kapoor from California. The best poem in this collection will be honoured with the Silver Minar.

Monday, 20 August 2012

फेस्बूक





-          डॉ अनीता कपूर

फेस्बूक बनाम पिंगपोंग
मार्क एलियट ज़ुकेरबर्ग ने, फेस्बूक का ईज़ाद करके, विश्व के बड़े से गोले को जैसे एक छोटी सी पिंगपोंग गेंद में तबदील कर दिया। आप घर बैठे या चलते-फिरते, दुनिया के किसी भी कोने से, कहीं भी, किसी से बात कर सकते हैं। फेस्बूक की अपनी एक दुनिया और अपना ही एक आकाश है। बिनदेखे, बिनजाने बेखौफ मगर एक अपनेपन और प्यार से एक दूसरे के साथ, भावनाओं से जुड़ना, सम्मान....घनिष्ठता...मोह...की लहर ने उन फकेबुकियों को अपनी लपेट में ले लिया है, जो इसका सही महत्व समझते है, इस सामाजिक नेटवर्क की इज्ज़त करते है....फिर चाहे वो लेखक हो या साहित्यकार, फिल्म के लोग हो, राजनीति से हो, या कोई ग्रहणी। उम्र और जातपांत से परे फेस्बूक मित्रता का वो नशा है....जिसके बिना न तो हमारी सुबह होती है और न ही रात। नए मित्रों से परिचय, और विचारों का आदान-प्रदान, आपकी पहचान का दायरा बढ़ाता है। पर अफसोस कि, यहाँ भी कुछ असामाजिक तत्व, अपने-अपने अंदाज मे गंदगी फैलाने से बाज नहीं आते। कंपनी बाग समझ अपने पुरुष होने की मानसिकता में जकड़े, औरतों पर छींटाकशी यदा-कदा करते दिख जाते हैं। बदलते परिवेश और समाज के चलते कुछेक युवा वर्ग भी अश्लील हरकतों से बाज़ नहीं आते, जिन्हे देख शर्म के साथ-साथ अफसोस भी होता है, यह सोचकर कि, हमारे समाज को क्या हो गया है? बावजूद इसके, फेस्बूक आपको वक्त के साथ चलाता है, और सब खबरों से भी वाकिफ़ करवाए रखता है। कितनी अनोखी बात है न कि, घर के अंदर रहकर भी आप फेस्बूक के ज़रिए दुनिया के साथ पहले से भी ज्यादा जुड़ गए है....इस आज़ादी के साथ कि, अगर कोई मित्र आपकी भावनाओं को लगातार ठेस पहुंचाए तो बिना किसी बहस या झगड़े के, चुपके से उसे अपनी मित्रता-सूची से बाहर कर दें। किसी मित्र के घर जाना हो तो बगैर फोन किए उसकी वाल पर कुछ भी पोस्ट कर देना, बिना अनुमति लिए घुसपैठ करना, तांक-झांक करना। कहिए- मिलेगी ऐसी आज़ादी कहीं और?  
  

Tuesday, 14 August 2012

आजादी-दिवस पर कुछ हाइकु


कैसे बचेगा
शहीदों का ये देश
करो चिंतन

कैसे बचेगी
संस्कृति ये पुरानी
करो मंथन  

आओ उखाड़ें
भ्रष्टाचार की जड़ें
बदल बीज

सिकुड़े दिल
सिमट रही धरा
सींचों लहू से

चैनों अमन 
पुकारता वतन
सुन लो इसे 

साँसों के हस्ताक्षर


Tuesday, 7 August 2012

त्रिवेणी में प्रकाशित कुछ सदोका





त्रिवेणी में प्रकाशित कुछ सदोका 

WEDNESDAY, AUGUST 8, 2012

मैं मुसाफिर(सेदोका)


1-डॉ अनीता कपूर
1
पी डाला दर्द
रूह की चिमनी से
जैसे गीत -संगीत
पकड़ धुआँ
लपेट चाँदनी में
लिखा रंगीला गीत ।
2
कवि की आँख
वेदना की धरती
फूटती  हैं कोंपलें,
शब्दों मे पिरो 
करें काव्य-सृजन
खुदा की नियामत  ।
3
चाहे चर्च या
हो गुरुद्वारा कोई
भक्ति के वृक्ष सभी
माँगे है खाद
प्रेम मुहब्बत की
अरदास  रब की ।
4
दिल दिमाग
चलता है चक्की-सा  
पिसता दिल ही है,
कशमकश
में फिसली जिंदगी
छूटता वक्त ही है 
5
मैं मुसाफिर
जानकर भी भूली
मिट जाएँगे सब,
ये रिश्ते नाते
बन जाऊँगी मैं भी
अफसाना पुराना ।
 6
न पहचान
असली लाभ-हानि
की रही है मुझको,
जो पहचाना
तो बस दिल ही को