Thursday, 5 July 2012

तांका

नदी में चाँद
तैरता था रहता
पी लिया घूँट
नदी का वही चाँद

आज हथेली मेरे...

8 comments:

  1. बहुत ही खूबसूरत !

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  2. BHAWPOORAN KHOOBSOORAT PANKTIYAN.

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  3. बहुत सुन्दर अनीता जी....
    शब्दों की पाबंदी के बाद भी सुन्दर अभिव्यक्ति.....

    अनु

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  4. बहुत सुन्दर अनीता जी....


    अनु

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  5. आपकी यह सुन्दर रचना दिनांक 18.10.2013 को http://blogprasaran.blogspot.in/ पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें और अपने सुझाव दें।

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  6. बहुत खूब अनीता जी

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  7. बहुत खूब कहा। बधाई स्वीकारें।

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