डॉ अनीता कपूर
डँसता रहा
अतीत अब तक
परछाई-सा
कराहती जिन्दगी
फसाना बन गई ।
अतीत अब तक
परछाई-सा
कराहती जिन्दगी
फसाना बन गई ।
2
बिखरा मन
सर्द-सी हुई सोच
बिखरा तन
सर्द-सी हुई देह
आसमान गीला था ।
सर्द-सी हुई सोच
बिखरा तन
सर्द-सी हुई देह
आसमान गीला था ।