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Sunday, 2 October 2011

ताँका

   डॉ अनीता कपूर
      1
 डँसता रहा
 अतीत अब तक
परछाई-सा
कराहती जिन्दगी
फसाना बन गई ।
  
2
बिखरा मन
सर्द-सी हुई सोच
बिखरा तन
सर्द-सी हुई देह
आसमान गीला था  ।