Monday, 9 July 2012

अनुभव रबरसों पहले कॉलेज की वार्षिक पत्रिका संपादित किया करती थी। ......अब एक अरसे बाद फिर, 'पोएट्स कोर्नर' नामक संस्था द्वारा और रोचक पब्लिशिंग, इलाहाबाद द्वारा प्रकाशित, एक कविता संग्रह, "बिखरी ओस की बूंदें", को शीला डोंगरे जी के साथ संपादित किया। अच्छा हा।

Thursday, 5 July 2012

तांका

नदी में चाँद
तैरता था रहता
पी लिया घूँट
नदी का वही चाँद

आज हथेली मेरे...

Friday, 29 June 2012

अधूरी नज़्म


अधूरी नज़्म

मिले थे हम बरसों बाद
तुमने कुछ सुनाया था...
मैंने भी उसमे कुछ जोड़ा था
तुम्हारी अधूरी नज़्म को
रूहानी शब्दों से थोड़ा सा मोड़ा था
मैंने जब कहा, कि देखो
अधूरी नज़्म को आगे बढा दिया
तुमने कहा, नहीं
ज़िंदगी को आगे बढ़ा दिया..
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