आइए आपका इन्तजार था
मेरे प्रिय ब्लॉग एवं साइट
फ़ोण्ट-परिवर्तक
हिन्दी हाइकु
हिन्दी टाइम्स
सहज साहित्य
शब्दों का सफ़र
शब्दों का उजाला
लेखनी
लिपि परिवर्तक
लम्हों का सफ़र
रोमन से हिन्दी
रचनाकार
त्रिवेणी
उदन्ती
अभिव्यक्ति
अनुभूति
Sunday, 5 February 2012
garbhnaal
Wednesday, 1 February 2012
बसंती हाइकु
रंग बसंत
निखरी हर दिशा
रूप अनंत
Thursday, 19 January 2012
खुद सुबह सर्दी से ठिठुरती
अलसाई अलसाई
पिछवाड़े की झाड़ियों में अटकी हुई
कोहरे के चादर में मुँह छिपा
इतनी सिकुड़ गयी है
घबरा कर बाहर आ कर
चाय की चुस्की लेने से भी
डर गयी
है
बनता ही रहता है नज़मों का ताजमहल तब तक
रहे लफ़्जों की महक कागज़ के बदन पर जब तक
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)