Showing posts with label कविता: डॉ अनीता कपूर. Show all posts
Showing posts with label कविता: डॉ अनीता कपूर. Show all posts

Monday, 18 February 2013

शब्दांकन ई पत्रिका Shabdankan E magazine's http://www.shabdankan.com/p/1-2.html डॉ. अनीता कपूर: कविताएँ, चोका और लघुकथा


Anita Kapoor shared शब्दांकन ई पत्रिका Shabdankan E magazine's photo.
9 hours ago
http://www.shabdankan.com/p/1-2.html
डॉ. अनीता कपूर: कविताएँ, चोका और लघुकथा

Sunday, 2 October 2011

वक़्त की सलवटें

डॉ अनीता कपूर

क़्त ने डाल दी है
अनगिनत सलवटें
मेरी जिंदगी की सफ़ेद चादर पर
हर सलवट
एक पूर्ण कहानी
जिसमे है
कुछ टूटने व कुछ बनने का अहसास
कली के मुस्कराने से लेकर
फूल बनकर मुरझा जाने तक का फासला
मैंने शराब की तरह पिया है
और छलक कर गिरी हुई बू
दों ने
नज्मो की शक्ल अख़्तियार कर ली है
-0-

रिश्ते

डॉ अनीता कपूर

कुछ रिश्ते जब बोझ बनने लगते हैं
दिए हुए नाम मिटने लगते हैं
जले हुए दिए बुझने लगते हैं
तो रिश्तो में से  काँटें निकल आतें हैं
हूलुहान होकर हम जिंदगी की बाजी हार जाते हैं
कुछ रिश्तें ऐसे भी होतें हैं
जो अनाम होतें हैं
क्त की गर्दिश से मुस्कुरानें लगतें हैं
समझदारी से सींच दो तो
अजूबा
कैक्टस में भी गुलाब खिलनें लगतें हैं
-0-

मशाल

जब से अन्ना ने जलाई, भ्रष्टाचार ख़त्म करने की  मशाल 
हर एक जेब जले, बाहर आने लगे !
और जब से यह जेब जले, बाहर आने लगे
नारे पे नारे लगाने लगे,
उन्हें देख, गूंगी बस्तियों के लोग भी गाने लगे!
और जब से, गूंगी बस्तियों के लोग गाने लगे

चंद बहरे भी सर हिलाने लगे!
अब, इस सरकार की बदगुमानी को क्या कहें
फितरतन, जेल में सबको डालने लगें! 
हाँ, इस डरी हुई सरकार को क्या कहें
टूटती सी दिखती कमर,  पर 
पूरा हिन्दुस्तान उस पर लादने लगे !
अन्ना का ताब, गाँधी जैसा, लोग मानने लगे 

यह सरकारी जादूगर, जैसे
नींद में भी सुर बदलने से डरने लगे!
अब नई किरण, नई जागृति, नया सुखद सवेरा   
सपना,  सोच,  बने हकीकत के पंख 
जीत रही जनता, मन हिलोरें लेने लगे!