Saturday, 8 October 2011

ताँका

बरसी घटा
पानी-पानी हुई मैं
बरसी घटा
उम्रके नभ खिला
दर्दीला   इंद्रधनुष 

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में उतरन
बनना नहीं चाहूँ
तू तो हवा सा
तूबदलता रिश्ते
कपड़ों की तरह

1 comment:

  1. main utaran nahi banana chahungi ... bahut sundar hai mam .

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