Wednesday, 20 March 2013

मेरी नजरों में कविता


कविता एक सहारा

कविता एक सहारा है
जब बेबसी बगावत करती है
और आँधी, अंधी गलियों से गुजरती है....

कविता एक सहारा है
जब सोच हवा में तिनके-सी उड़ती है
बिखर कर, फिर-फिर सिमट कर
शब्दों का चोला पहन लेती है....

कविता एक सहारा है
जब कोई खुशी आँखों से छलक़ती है
कोई नमकीन याद अहसास बन जाती है....

कविता एक सहारा है
कोई अनुभूति, सोच शब्दों में बंध जाती है
फिर उन शब्दों को कलम की नोक से
कागज़ पर चिपकाना मजबूरी हो जाती है....

कविता एक सहारा है
जब कल्पना के पंखों पर उड़ते परिंदे
स्मृति के शिलालेख बन जाते हैं....

कविता एक सहारा है
वह तो बस ओस में भीगते रहने की मौसमी मजबूरी
और जीने का तक़ाज़ा बन जाती है ......
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Wednesday, 13 March 2013

सपनों के फ़ाहे


सपनों के फ़ाहे

कल रात नींद मेरी
कुछ जख्मी हो गयी थी
चलूँ, आज रात सपनों के
कुछ फ़ाहे और पैबंद लगा दूँ

Tuesday, 19 February 2013

कविता पाठ

विश्व हिन्दी संस्थान, कनाडा, द्वारा आयोजित "विश्व कवि-सम्मेलन 2012-काव्यमाधुरी" में मेरी एक कविता का पाठ कृष्णा वर्मा जी द्वारा किया गया.......यह मेरे लिए सम्मान की बात है.......इस लिंक पर देखिये......

https://www.youtube.com/watch?v=CG0jsZXfYJU

ग्लोबल मीडिया और हिंदी पत्रकारिता..... संपादक : डॉ हरीश अरोड़ा .....(इस पुस्तक में एक लेख हमारा भी शामिल है.....) —